3 महीने का बच्चा क्या कर सकता है? - 3 maheene ka bachcha kya kar sakata hai?

In this article

  • तीन महीने का होने पर शिशु क्या कर सकता है?
  • मेरा शिशु स्थिरता से अपना सिर कब उठा सकेगा?
  • मेरा बच्चा पलटना कब शुरु करेगा?
  • शिशु पूरी रात सोना कब शुरु करेगा?
  • क्या शिशु को मेरे प्रति कोई लगाव पैदा हुआ है?
  • क्या तीन महीने के बच्चे को किताबें पढ़कर सुनाना फायदेमंद है?
  • मैं शब्दों को समझाने और उनके इस्तेमाल में तीन माह के शिशु की मदद कैसे कर सकती हूं?
  • मेरे तीन महीने के बच्चे में स्पर्श का अहसास किस तरह विकसित हो रहा है?
  • क्या मेरा शिशु सामान्य ढंग से विकसित हो रहा है?
  • अपना मत दें

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तीन महीने का होने पर शिशु क्या कर सकता है?

आपका शिशु अब आपसे बड़बड़ा कर बातें करना शुरु कर सकता है। आप दिन भर शिशु से बातें करें, इससे उसकी भाषा का कौशल विकसित होने में मदद मिलेगी। जो भी काम आप कर रही हों, शिशु को उसके बारे में बताएं, फिर चाहे वह पौधों में पानी डालना ही हो।

हो सकता है आप देखें कि शिशु उत्साह में आकर अपनी भुजाओं को हिला रहा है और टांगों से लाते मार रहा है। अगर आप शिशु के पैर जमीन पर टिका कर उसे पकड़कर खड़ा करें, तो वह अपनी टांगों पर नीचे की तरफ झुकने का दबाव डालेगा।

आपका शिशु अब अपने दोनों हाथ एक साथ ला सकता है, मुट्ठियां खोल सकता है और अपनी उंगलियों के साथ खेल सकता है। वह अपनी बंद मुट्ठी से लटकते हुए खिलौनों पर हाथ भी मार सकता है। शिशु के सामने कोई खिलौना लेकर बैठें, और देखें कि क्या वह उसे पकड़ने का प्रयास करता है। इस तरह उसके हाथ और आंख के बीच तालमेल विकसित होने में मदद मिलेगी।

मेरा शिशु स्थिरता से अपना सिर कब उठा सकेगा?

आपका शिशु अब बलिष्ठ हो रहा है। इस महीने वह पेट के बल लेटे हुए अपना सिर उठा सकता है और कुछ मिनटों तक इसी स्थिति में रह भी सकता है। अगर शिशु सहारे से बैठा हुआ हो, तो हो सकता है वह अपना सिर स्थिर और सीधा रख सके।

जब शिशु पेट के बल लेटा हो तो आप शायद पाएंगी कि वह अपना सिर और छाती ऊपर की तरफ उठाता है, जैसे कि वह पुश-अप करने वाला हो। सिर उठाने के लिए शिशु को प्रोत्साहित करने के लिए आप उसके सामने बैठकर ऊपर की तरफ कोई खिलौना हिलाएं और देखें कि क्या वह ऊपर देखने का प्रयास करता है। शिशु को पेट के बल लेटने का पर्याप्त समय देने से उसके सिर और गर्दन की मांसपेशियां विकसित और मजबूत होती हैं।

मेरा बच्चा पलटना कब शुरु करेगा?

अगर आप शिशु को पेट के बल लिटाएं, तो वह पलटकर पीठ के बल आकर आपको चौंका सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि उसके कूल्हे, घुटने और कोहनी के जोड़ मजबूत व और अधिक लचीले हो रहे हैंं। इसी वजह से शिशु के लिए खुद को ऊपर की तरफ उठा पाना आसान हो जाता है।

आपका शिशु बिना कोई संकेत दिए खुद ही पलटना सीख जाएगा, और इससे न केवल आप बल्कि वह स्वयं भी आश्चर्यचकित होगा! इसलिए शिशु को ऊंची सतह पर कभी भी अकेला न छोड़ें। अगर आप बिस्तर पर लिटाकर शिशु की लंगोट बदल रही हैं, तो अपना एक हाथ हमेशा शिशु के ऊपर ही रखें।

शिशु पूरी रात सोना कब शुरु करेगा?

नींद से वंचित माता-पिता अंतत: अब से कुछ राहत की उम्मीद कर सकते हैं। तीन से चार महीने के बाद से शिशु की नींद की दिनचर्या संभवतया स्थिर होना शुरु हो जाती है। इस उम्र के कुछ शिशु पूरी रात भी सो सकते हैं, हालांकि, अधिकांश शिशु अभी भी कुछ महीनों तक रात में स्तनपान करने के लिए जागते हैं।

यदि आपका शिशु भी आपको रात में जगाता है, तो फिक्र न करें। याद रखें कि ऐसा हमेशा नहीं रहेगा! शिशु की नींद की दिनचर्या का पालन करना जारी रखें, ताकि शिशु अपने सोने के समय को समझ सके। आप हमारी लोरियों को सुन सकती हैं और उनके बोल याद करके शिशु को सुना भी सकती हैं।

क्या शिशु को मेरे प्रति कोई लगाव पैदा हुआ है?

तीन महीने का होने पर या फिर इससे पहले से ही शिशु यह जानता है कि आप उसके लिए खास हैं। संभवतया अभी भी वह अनजान लोगों को देखकर मुस्कुराएगा, खासकर कि यदि वे सीधे उसकी आंखों में देखे और उससे प्यार से बोले व बातें करें तो।

मगर, शिशु अब यह पहचानना शुरु कर देता है कि उसकी जिंदगी में किसका स्थान क्या है और वह कुछ लोगों को अवश्य ही दूसरों की तुलना में विशेष दर्जा देता है।

दिमाग का जो हिस्सा हाथ और आंखों के समन्वय को नियंत्रित करता है और शिशु की चीजों को पहचानने में मदद करता है (पार्श्विका पालि, पेराइटल लोब), वह अब तेजी से विकसित हो रहा है। और दिमाग का जो हिस्सा जो सुनने, भाषा ज्ञान और सूंघने में सहायता करता है (टेम्पोरल लोब), वह भी अब अधिक सक्रिय हो रहा है।

इसलिए अब जब आपका शिशु आपकी आवाज सुनता है, वह सीधे आपकी तरफ देख सकता है। प्यार भरी मधुर आवाज निकालता है या बात करने का प्रयास कर सकता है।

क्या तीन महीने के बच्चे को किताबें पढ़कर सुनाना फायदेमंद है?

आपका शिशु अभी कहानियों को समझने के लिए बहुत छोटा है, मगर शिशु को कहानियां पढ़कर सुनाना उसके साथ बंधन मजबूत बनाने का अच्छा तरीका है। साथ है यह भविष्य में उसका भाषा कौशल विकसित करने में मदद करेगा।

अलग उच्चारणों और लहजों से अपनी आवाज के लय को बदलने का प्रयास करें, ताकि शिशु की रुचि बनी रहे। अगर, शिशु का मन कहानी से हटने लगे और वह किसी दूसरी तरफ देखने लगे, तो कुछ और आजमा कर देखें। या फिर आप उसे कुछ समय का आराम भी दे सकती हैं।

अगर, आपने अभी तक शिशु को कहानी सुनाना शुरु नहीं किया है, तो सोने के समय शिशु को कहानी सुनाना शुरु करने का यह सही समय है। ऐसी बहुत सी किताबें हैं जिन्हें आप शिशु को पढ़कर सुना सकती हैं। आप कपड़े या गत्ते (बोर्ड) की किताबें ले सकती हैं जिनमें बड़े, चमकीले रंग की तस्वीरें हों, जिनके बारे में आप बात कर सकें।

अगर, आप यह नहीं समझ पाती कि शिशु से क्या बात की जाए, तो उसे अपने और परिवार के सदस्यों के बारे में ही बताना शुरु कर सकती हैं। आप घर के सबसे अरुचिकर काम को करते हुए, उसके बारे में भी शिशु को बता सकती हैं।

बहुत से लोगों को छोटे बच्चे से बातें करना अजीब लगता है, मगर चिंता न करें, शिशु को यह सब अच्छा लगता है।

अगर, बड़े बच्चों की किताबों में साफ, स्पष्ट तस्वीरें और चमकीले रंग हैं, तो आप उन किताबों का भी इस्तेमाल कर सकती हैं। ये किताबें भी शिशु का ध्यान आकर्षित करने में अवश्य मदद करेंगी। यहां तक कि आप शिशु को अपनी पसंदीदा मैगजीन पढ़कर भी सुना सकती हैं। शिशु को आपके बोलने का लहजा फिर भी अच्छा लगेगा, फिर चाहे वह आपके शब्दों को न समझे।

या फिर आप शिशु को कविताएं भी पढ़कर सुना सकती हैं, फिर चाहे वे शेक्सपीयर की हों या तुलसीदास की। चाहे आपका शिशु इन्हें समझता न हो, मगर इन्हें संगीतमय तरीके से सुनना शिशु को बहुत पसंद आता है। इस तरह शिशु के साथ आपका भी मनोरंजन हो जाएगा!

मैं शब्दों को समझाने और उनके इस्तेमाल में तीन माह के शिशु की मदद कैसे कर सकती हूं?

अब आपका शिशु बुदबुदाना और प्यार भरी मीठी बोली निकालना शुरु कर चुका है। ऐसे में उससे बातें करने से उसकी शब्दों को समझने की क्षमता विकसित होगी। यह शिशु के बातचीत करने के हुनर की शुरुआत है।

शिशु के साथ खेलते समय, रोजमर्रा के काम जैसे नैपी बदलते हुए और कपड़े पहनाते हुए भी उससे बात करते रहें। इससे उसके बातचीत के कौशल को विकसित होने में मदद मिलेगी। साथ ही, इस तरह आप उसे खुद को अभिव्यक्त करने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही हैं।

यहां तक कि शिशु के साथ बाजार की सैर भी उसका भाषा कौशल विकसित करने का अच्छा अवसर है। आप सब्जी खरीदते समय उस सब्जी की ओर इशारा करते हुए उसका नाम लेती हैं, तो यह भी शिशु को प्रोत्साहित करने में सहायक है।

जब आप दोस्तों या परिवारजनों से बात कर रही हों, तो शिशु को आपकी बातचीत सुनने में मजा आएगा। अभी आपका शिशु शब्दों को दोहरा नहीं सकता, मगर वह सारी जानकारी अपनी तेजी से विकसित हो रही याददाश्त में संग्रह करके रखना शुरु कर रहा है।

अगर, आपके घर में दो भाषाएं बोली जाती हैं, तो सुनिश्चित करें कि जन्म के बाद से ही वह नियमित तौर पर दोनों भाषाओं को सुनता रहे। एक से अधिक भाषा बोले जाने पर शिशु के भाषा संबंधी कौशल को विस्तार मिलेगा।

मेरे तीन महीने के बच्चे में स्पर्श का अहसास किस तरह विकसित हो रहा है?

आप पाएंगी कि शिशु अपने पास रखी चीजों तक पहुंचने और उन्हें छूने का प्रयास कर रहा है। आप अलग-अलग तरह के कपड़ों या सामान से शिशु के स्पर्श के अहसास को प्रेरित करने का प्रयास कर सकती हैं। टिशू, मखमल (वैल्वेट), रोएंदार वस्त्र (फर) और तौलिये का इस्तेमाल आप कर सकती हैं। या फिर ऐसी किताबों को लें, जिन्हें पढ़ते समय शिशु छू भी सकता है।

आपके शिशु को आपका स्पर्श बेहद पसंद है। शिशु को सहलाना, गोद में उठाना, मालिश करना या फिर गोद में लेकर झुलाना, उसे राहत दे सकता है। इससे शिशु की सतर्कता और ध्यान की अवधि भी बढ़ सकती है।

जब तक शिशु को मजा आ रहा हो, आप और आपके पति शिशु के साथ त्वचा से त्वचा का संपर्क रख सकती हैं। यदि आप शिशु को स्तनपान करवाती हैं तो हर बार आपको शिशु के साथ नजदीकी समय गुजारने को मौका मिलेगा।

यदि आप या आपके पति शिशु को फॉर्मूला दूध पिलाते हैं, तो उसे गोद में लेकर छाती से सटाकर त्वचा से त्वचा का संपर्क रखें। इस तरह शिशु और आपको त्वचा से त्वचा के संपर्क के फायदे मिलेंगे। आप शिशु के साथ के ये प्यार और दुलार के लम्हों का आनंद उठा सकते हैं।

क्या मेरा शिशु सामान्य ढंग से विकसित हो रहा है?

हर शिशु अलग होता है और शारीरिक क्षमताएं अपनी ही गति से विकसित करता है। यहां सिर्फ साधारण मार्गदर्शक दिए गए हैं, जिन्हें करने की क्षमता आपके शिशु में होती है। अभी नहीं, तो कुछ समय बाद शिशु उन्हें जरुर हासिल कर लेगा।

अगर, आपके शिशु का जन्म समय से पहले (गर्भावस्था के 37 सप्ताह से पहले) हुआ है, तो आप देखेंगे कि उसे वे सब चीजें करने में ज्यादा समय लगता है, जो समय से जन्मे बच्चे जल्दी करते हैं। यही कारण है कि समय से पहले पैदा होने वाले शिशुओं को उनके डॉक्टरों द्वारा दो उम्र दी जाती हैं:

  • कालानुक्रमिक (क्रोनोलॉजिकल) उम्र, जिसकी गणना शिशु के जन्म की तारीख से की जाती है
  • समायोजित उम्र (एडजस्टेड/करेक्टेड ऐज), जिसकी गणना आपके शिशु के पैदा होने की तय तारीख (ड्यू डेट) से की जाती है

आप अपने प्रीमैच्योर शिशु के विकास को उसकी समायोजित उम्र से देखें, उसके जन्म की वास्तविक तिथि से नहीं। अधिकांश डॉक्टर समय से पूर्व जन्म लिए बच्चे का विकास उसकी संभावित जन्म तिथि से आंकलित करते हैं और उसी अनुसार उसकी कुशलता का मूल्यांकन करते हैं।

यदि आपको अपने शिशु के विकास के संबंध में कोई प्रश्न हैं, तो अपनी डॉक्टर से सलाह करें। शिशु के विकास और कौशल के बारे में आप हमारे हिंदी ग्रुप में अपने ही जैसे अन्य माता-पिता से चर्चा कर सकते हैं।

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References

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Sheridan M. 2008. From birth to five years: children’s developmental progress. London: Routledge

3 महीने बच्चे को क्या देना चाहिए?

3 महीने का शिशु जन्‍म के समय से अब थोड़ा सेहतमंद हो चुका होता है। मां के दूध से मिले पोषण से तीन महीने के बच्‍चे का काफी विकास हो चुका होता है। उम्र के हिसाब से शिशु को डेवलपमेंट स्‍केल पर कई चीजें और स्किल सीखने होते हैं और यह बात 3 महीने के शिशु पर भी लागू होती है।

3 महीने का बच्चा क्या क्या हरकतें करता है?

वह बहुत मिलनरसा हो जाता है, जिससे से भी मिलता है मुस्कुराता है और उसके साथ खेलता है। लगभग 6 महीने की उम्र में, आपका बच्चा आपके और उन अन्य लोगों के प्रति अत्याधिक स्नेह दिखाना शुरू कर देगा, जो लगातार उसकी देखभाल करते हैं। जैसे ही वह आपको दूसरों से अलग करना सीख जाता है, वह अजनबियों से सावधान हो जाता है।

बच्चे कितने महीने में पलटी मारते हैं?

अगर आपका बच्‍चा भी चार महीने का है, तो आपकाे पता होना चाहिए कि इतना बड़ा बच्‍चा क्‍या कुछ सीख लेता है। जन्‍म के बाद हर महीने शिशु का विकास आगे बढ़ता रहता है। पैदा होने के बाद शुरुआती चार महीनों में बच्‍चा मूव करने से लेकर जमीन पर खिसक-खिसक कर चलने लगता है और अब वह अपने आसपास की चीजों को भी पहचानने लगता है।

शिशु कब से पलटता है?

आपका शिशु शायद छह या सात महीने की उम्र में पलटना शुरु करेगा। इस समय तक उसकी गर्दन और बाजुओं की मांसपेशियां मजबूत हो चुकी होंगी। कुछ शिशु तीन महीने की उम्र में ही पलट लेते हैं, वहीं कुछ अन्य शिशुओं को ऐसा करने में सात महीने से भी अधिक समय लग जाता है।